Business Owners के लिए Life Insurance Tax Planning 2026: सुरक्षा, बिजनेस निरन्तरता और टैक्स छूट का गाइड

Business Owner Life Insurance Tax Planning 2026

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Business owners के लिए Life Insurance, family protection, business continuity और tax planning की जानकारी।


एक बिजनेस ओनर के रूप में, आपकी वित्तीय जिम्मेदारियां केवल आपके परिवार तक सीमित नहीं होती हैं; उनमें आपके कर्मचारी, बिजनेस लोन, वेंडर और बिजनेस पार्टनर भी शामिल होते हैं।

 अक्सर देखा जाता है कि उद्यमी टैक्स बचाने (Tax Saving) की जल्दी में जीवन बीमा नीतियां खरीदते हैं, लेकिन सही टैक्स प्लानिंग और सुरक्षा संरचना के अभाव में वे कानूनी पेचीदगियों में फंस जाते हैं। 

वर्ष 2026 में आयकर नियमों (Income Tax Rules) और विनियामक दिशानिर्देशों (IRDAI Rules) में कई स्पष्टता आई है। 

बिजनेस ओनर्स के लिए जीवन बीमा केवल एक टैक्स सेविंग टूल नहीं है, बल्कि यह Business Continuity, Key Person Risk Management, Succession Planning और Asset Protection का सबसे मजबूत स्तंभ है।

💡 Business Owners के लिए Life Insurance Tax Planning क्या है?
Featured Snippet:

Business Owners के लिए Life Insurance Tax Planning एक रणनीतिक वित्तीय प्रक्रिया है, जिसके तहत उद्यमी अपने व्यक्तिगत परिवार, बिजनेस लोन और की-पर्सन जोखिमों (Keyman Risks) को सुरक्षित रखते हुए आयकर अधिनियम के लागू प्रावधानों (Section 80C, Section 10(10D) और Business Expense Deductions) के अनुसार कानूनी रूप से अपनी टैक्स देनदारी को कम करने की योजना बनाते हैं।

⚠️ ध्यान दें: वास्तविक टैक्स लाभ पॉलिसी के प्रकार, प्रीमियम, पॉलिसी की तारीख, कर व्यवस्था और लागू आयकर नियमों पर निर्भर करता है। निवेश या बीमा लेने से पहले मौजूदा नियमों की जांच करें।


Business Owners के लिए Life Insurance की आवश्यकता क्यों है?

बिजनेस में अनिश्चितता हमेशा बनी रहती है। किसी प्रमोटर या मुख्य भागीदार के न रहने पर बिजनेस के अस्तित्व पर संकट आ सकता है। लाइफ इंश्योरेंस बिजनेस ओनर्स के लिए निम्नलिखित 5 महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम करता है:

1.बिजनेस लोन और लायबिलिटी से सुरक्षा (Business Loan & Debt Protection):

यदि किसी प्रोप्राइटर या पार्टनर पर वर्किंग कैपिटल लोन, टर्म लोन या पर्सनल गारंटी है, तो उनकी असामयिक मृत्यु की स्थिति में बैंक या लेनदार बिजनेस संपत्तियों और परिवार की व्यक्तिगत संपत्तियों को कुर्क कर सकते हैं। सही सम एश्योर्ड वाली टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी इन सभी देनदारियों को कवर करती है।

2. पारिवारिक सुरक्षा (Family Financial Protection):

व्यक्तिगत और व्यावसायिक वित्त को अलग रखना आवश्यक है। एक समर्पित टर्म प्लान यह सुनिश्चित करता है कि बिजनेस के नुकसान का असर परिवार के रहन-सहन और भविष्य के लक्ष्यों पर न पड़े।

3. की-पर्सन रिस्क (Key Person Risk Management):


किसी भी कंपनी में कुछ ऐसे व्यक्ति (जैसे चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर, मुख्य सेल्स हेड या फाउंडर) होते हैं, जिनके बिना बिजनेस का राजस्व ठप हो सकता है। ऐसे महत्वपूर्ण व्यक्तियों के लिए कीमैन इंश्योरेंस (Keyman Insurance) लिया जाता है।

4. बिजनेस निरन्तरता और लिक्विडिटी (Business Continuity & Liquidity):

साझेदार की मृत्यु होने पर उसके कानूनी वारिसों को उनका हिस्सा चुकाने के लिए त्वरित नकदी (Instant Cash) की आवश्यकता होती है। इंश्योरेंस मैच्योरिटी या क्लेम का पैसा बिजनेस को बिना बेचे यह तरलता प्रदान करता है।

5. उत्तराधिकार योजना (Succession Planning):

पार्टनर्स या शेयरधारकों के बीच Buy-Sell Agreement को फाइनेंस करने के लिए जीवन बीमा सबसे कम खर्चीला और प्रभावी माध्यम है।


Keyman Insurance (कीमैन इंश्योरेंस) क्या है और यह सामान्य लाइफ इंश्योरेंस से कैसे अलग है?

कीमैन इंश्योरेंस (Keyman Insurance Policy) एक ऐसी जीवन बीमा नीति है जिसे कोई नियोक्ता (Employer/Company) अपने किसी ऐसे कर्मचारी या डायरेक्टर के जीवन पर खरीदता है, जिसका विशेष ज्ञान, अनुभव या योगदान कंपनी के मुनाफे के लिए अति आवश्यक हो।


Keyman Insurance का टैक्स ट्रीटमेंट (Tax Treatment):

सामान्य व्यक्तिगत जीवन बीमा पॉलिसी और कीमैन इंश्योरेंस के टैक्स नियमों में बुनियादी अंतर होता है:

खरीदते समय (At the time of buying):

नियोक्ता (Employer) द्वारा चुकाया गया प्रीमियम कर्मचारी के हाथों में टैक्स योग्य नहीं होता है, लेकिन नियोक्ता के लिए यह बिजनेस एक्सपेंस (Business Expense) के रूप में पूरी तरह से टैक्स डिडक्टिबल (Deductible) होता है।


Keyman Insurance Tax Treatment 2026

Keyman Insurance का Tax Treatment 2026 – Premium, Assignment और Claim की जानकारी
Keyman Insurance में Premium, Assignment और Maturity या Claim की Tax Treatment समझें।


असाइनमेंट के समय (At the time of assignment):

यदि यह पॉलिसी बाद में कर्मचारी या उसके परिवार को असाइन (Transfer) की जाती है, तो असाइनमेंट के समय कोई टैक्स नहीं लगता, परंतु मैच्योरिटी पर मिलने वाली राशि कर्मचारी के लिए टैक्स योग्य हो जाती है।

मैच्योरिटी या क्लेम के समय (At Maturity or Claim):

यदि मैच्योरिटी या क्लेम की राशि कंपनी/नियोक्ता प्राप्त करती है, तो इसे कंपनी की व्यावसायिक आय (Business Income) माना जाता है और इस पर कॉर्पोरेट टैक्स दर से टैक्स लगता है।

 यदि यह राशि कर्मचारी को मिलती है, तो इसे Profit in lieu of salary" के रूप में माना जाता है और टैक्स लगता है।

यदि मृत कर्मचारी के कानूनी वारिस या विधवा को भुगतान किया जाता है, तो यह राशि कर-मुक्त (Non-taxable) रहती है ,।


Keyman Insurance बनाम Employer-Employee Insurance


📊 Keyman Insurance vs Employer-Employee Insurance
पैमाना Keyman Insurance Policy Employer-Employee Insurance
उद्देश्य कंपनी को की-पर्सन के नुकसान से बचाना। कर्मचारी को वेलफेयर और रिटेंशन बेनिफिट देना।
प्रीमियम का टैक्स डिडक्शन लागू शर्तों के अधीन कंपनी के लिए बिजनेस खर्च के रूप में डिडक्शन संभव हो सकता है। कंपनी के लिए खर्च हो सकता है, जबकि कर्मचारी के लिए लागू परिस्थितियों में Perquisite माना जा सकता है।
मैच्योरिटी / क्लेम टैक्स कंपनी को प्राप्त राशि की टैक्स ट्रीटमेंट लागू आयकर नियमों के अनुसार होगी। कर्मचारी को प्राप्त राशि की टैक्स ट्रीटमेंट पॉलिसी और लागू Section 10(10D) की शर्तों पर निर्भर करेगी।
⚠️ टैक्स नोट: बीमा प्रीमियम की डिडक्शन और क्लेम/मैच्योरिटी की टैक्स ट्रीटमेंट पॉलिसी की संरचना, भुगतानकर्ता, लाभार्थी और लागू आयकर प्रावधानों पर निर्भर करती है। टैक्स प्लानिंग से पहले वर्तमान नियमों की जांच करें।

Tax Benefits: Section 80C, Section 10(10D) एवं 2026 के नए नियम:

आयकर विभाग द्वारा जीवन बीमा पॉलिसियों के कराधान को लेकर जारी स्पष्टीकरण के अनुसार मुख्य प्रावधान निम्नलिखित हैं:

1. Section 80C (प्रीमियम पर टैक्स डिडक्शन)

व्यक्ति, HUF, स्व-नियोजित या प्रोप्राइटर अपने, अपनी पत्नी और बच्चों के जीवन बीमा प्रीमियम पर ₹1,50,000 प्रति वर्ष तक की छूट प्राप्त कर सकते हैं।

10% Sum Assured Cap:

01-04-2012 के बाद जारी पॉलिसियों के लिए वार्षिक प्रीमियम सम एश्योर्ड (Sum Assured) के 10% से अधिक नहीं होना चाहिए। यदि प्रीमियम 10% से अधिक है, तो केवल 10% तक की राशि ही डिडक्शन के लिए पात्र होगी।

2. Section 10(10D) (मैच्योरिटी और डेथ बेनिफिट्स पर टैक्स छूट)

सामान्य जीवन बीमा पॉलिसियों के तहत मैच्योरिटी या क्लेम पर मिलने वाली राशि Section 10(10D) के अंतर्गत कर-मुक्त होती है, परंतु इस पर निम्नलिखित कड़े नियम लागू हैं:

Death Benefit (मृत्यु लाभ):

बीमाधारक की मृत्यु की स्थिति में मिलने वाली दावों की राशि पूरी तरह कर-मुक्त रहती है, चाहे प्रीमियम कितना भी अधिक क्यों न हो या नीतियां कितनी भी हों।

₹5 Lakh Premium Rule (Non-ULIP Policies):

1 अप्रैल 2023 को या उसके बाद जारी की गई गैर-यूलिप (Traditional Endowment/Money-back) पॉलिसियों के लिए, यदि किसी वित्तीय वर्ष में कुल वार्षिक प्रीमियम ₹5,00,000 (₹5 लाख) से अधिक है, तो मैच्योरिटी पर मिलने वाली राशि पर Section 10(10D) की कर-छूट नहीं मिलेगी।

₹2.5 Lakh Premium Rule (ULIPs): 

1 फरवरी 2021 के बाद जारी यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (ULIP) में यदि कुल वार्षिक प्रीमियम ₹2,50,000 (₹2.5 लाख) से अधिक है, तो 10(10D) के तहत मैच्योरिटी छूट नहीं मिलती। 

ऐसी स्थिति में ULIP से होने वाली आय को Capital Gains के रूप में टैक्स किया जाता है (Equity ULIPs u/s 111A/112A)।

Section 56(2)(xiii) के तहत टैक्स गणना (Taxation on High Premium Policies)

यदि किसी नीति का प्रीमियम ₹5 लाख की सीमा पार कर जाता है और 10(10D) की छूट नहीं मिलती है, तो मैच्योरिटी पर प्राप्त आय को "Income from Other Sources" (Section 56(2)(xiii)) के तहत कर योग्य माना जाता है।

$$\text{Taxable Amount} = \text{Total Amount Received} - \text{Total Premiums Paid}$$

अर्थात केवल शुद्ध लाभ/ब्याज पर ही स्लैब दर से टैक्स लगेगा, पूरे प्रिंसिपल प्रीमियम पर नहीं।

TDS u/s 194DA

यदि जीवन बीमा से प्राप्त राशि Section 10(10D) के तहत कर-मुक्त नहीं है, तो बीमा कंपनी भुगतान करते समय 2% की दर से TDS (Tax Deducted at Source) काटती है।

Old vs New Tax Regime (पुराणी बनाम नई टैक्स व्यवस्था):

Old Tax Regime:

इसमें Section 80C का ₹1.5 लाख का डिडक्शन उपलब्ध रहता है।

New Tax Regime:

इसमें Section 80C जैसी डिडक्शन्स उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि, यदि आपकी पॉलिसी Section 10(10D) के नियमों (जैसे ₹5 लाख या ₹2.5 लाख की सीमा के भीतर) को पूरा करती है, तो उसकी मैच्योरिटी राशि न्यू टैक्स रिजीम में भी पूरी तरह कर-मुक्त रहती है।


Business Structure Comparison Table: बीमा और टैक्स रणनीतियाँ:

अलग-अलग व्यावसायिक संरचनाओं के लिए बीमा खरीदने का तरीका और उसका टैक्स प्रभाव भिन्न होता है:

Business Structure Policy Owner / Beneficiary Premium Tax Status Section 10(10D) Status सुझाई गई बीमा रणनीति
Sole Proprietor
(एकल स्वामित्व)
खुद मालिक / परिवार पुराने टैक्स रिजीम में पात्र पॉलिसी के लिए Section 80C के तहत लागू सीमा और शर्तों के अनुसार कटौती संभव। Section 10(10D) की छूट पॉलिसी के प्रकार, प्रीमियम और लागू शर्तों पर निर्भर करती है। व्यक्तिगत Term Plan + जरूरत के अनुसार MWP Act पर विचार।
Partnership Firm / LLP फर्म या पार्टनर्स Keyman Insurance का प्रीमियम लागू शर्तों के अधीन बिजनेस खर्च के रूप में डिडक्टिबल हो सकता है। Keyman Insurance से प्राप्त राशि पर Section 10(10D) की सामान्य छूट लागू नहीं होती। Cross-Option Insurance / Keyman Insurance पर विचार।
Private Limited Company कंपनी / प्रमोटर Keyman Premium वास्तविक व्यावसायिक उद्देश्य और लागू नियमों के अधीन Corporate Expense हो सकता है। कंपनी को प्राप्त Keyman Insurance राशि Section 10(10D) के तहत सामान्यतः कर-मुक्त नहीं होती। Keyman Insurance + Group Term Insurance पर विचार।
MSME / Startups प्रमोटर / Loan Account लोन सुरक्षा के लिए लिया गया Insurance Premium स्वतः Tax Deductible नहीं होता; लागू नियमों पर निर्भर करता है। Section 10(10D) का लाभ पात्रता और लागू शर्तों के अनुसार निर्धारित होगा। Loan Cover Term Insurance + Bank Lien Assignment पर विचार।
⚠️ महत्वपूर्ण नोट: यह जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। Insurance Premium की Deduction और Section 10(10D) की Tax Treatment पॉलिसी के प्रकार, Policy Owner, Beneficiary, Premium, Policy Issue Date और लागू Income Tax Rules पर निर्भर करती है। निर्णय लेने से पहले वर्तमान आधिकारिक नियमों की जांच करें।


Statistics Data Snippet: IRDAI Official Data:

भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारतीय जीवन बीमा उद्योग में व्यावसायिक एवं व्यक्तिगत सुरक्षा रुझान निम्नलिखित हैं:

📊 Insurance Industry Data – 2026
विवरण / सूचकांक रिपोर्टिंग अवधि / वर्ष आधिकारिक आंकड़े / मान डेटा स्रोत
First Year Premium of Life Insurers 31 अगस्त 2026 तक
Monthly Figures
भारत में जीवन बीमाकर्ताओं द्वारा नए व्यवसाय से एकत्रित प्रथम वर्ष का प्रीमियम। IRDAI Monthly Business Figures
09-09-2026
Gross Direct Premium
(Non-Life / Health)
अगस्त 2026 तक के महीने के लिए गैर-जीवन और स्वास्थ्य बीमाकर्ताओं का सकल प्रत्यक्ष प्रीमियम। IRDAI Flash Figures
15-09-2026
Registered Life Insurers Directory वर्ष 2026 सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की पंजीकृत जीवन बीमा कंपनियों की आधिकारिक सूची। IRDAI Official Directory
📌 डेटा नोट: उपरोक्त आंकड़े/सूचकांक IRDAI की संबंधित रिपोर्टिंग अवधि और आधिकारिक प्रकाशनों के संदर्भ में दिए गए हैं। आंकड़ों का उपयोग करते समय रिपोर्टिंग अवधि और प्रकाशन की तारीख अवश्य देखें।


Visual Graph Snippet: Insurance Growth & Protection Index:

निम्नलिखित टेक्स्ट-आधारित चार्ट जीवन बीमा के तहत कवरेज और प्रीमियम वृद्धि की दिशा को दर्शाता है:

IRDAI Reporting Data Highlights (Aug 2026)
First Year Premium (Life Insurers) : ████████████████████ (High Growth Trend)
Gross Direct Premium (Non-Life) : ███████████████ (Steady Expansion) 
(Source: Verified IRDAI Official Monthly Business Releases - Aug 2026)


Insurance Growth & Protection Index – IRDAI August 2026

Insurance Growth and Protection Index IRDAI Reporting Data August 2026
IRDAI के अगस्त 2026 रिपोर्टिंग डेटा में Life और Non-Life Insurance Premium के प्रमुख संकेतक।


Practical Tool: Business Owner Life Insurance Tax Planning Checklist:

यह चेकलिस्ट/कैल्कुलेटर फ्रेमवर्क केवल शैक्षणिक उद्देश्यों और पात्रता जांच (Educational Eligibility Check) के लिए तैयार किया गया है:

🧾 Life Insurance Tax Planning Checklist
Business Owners के लिए Basic Tax Eligibility Check
Input Parameters (इनपुट डेटा)
⚠️ Disclaimer: यह टूल केवल सामान्य शैक्षिक जानकारी और प्रारंभिक checklist के लिए है। वास्तविक tax treatment policy type, policy issue date, premium, sum assured, policy ownership, beneficiary और लागू Income Tax Rules पर निर्भर करता है। अंतिम tax calculation के लिए वर्तमान आधिकारिक नियमों या qualified tax professional की सलाह लें।


व्यावहारिक उदाहरण (Fictional Business Case Study):

निम्नलिखित उदाहरण के द्वारा समझिए:

मामला:

राजेश गुप्ता "गुप्ता इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड" के संस्थापक और प्रबंध निदेशक हैं। कंपनी का वार्षिक टर्नओवर ₹15 करोड़ है और उन्होंने मशीनरी विस्तार के लिए ₹2 करोड़ का बैंक लोन लिया हुआ है। कंपनी में एक मुख्य रिसर्च हेड (डॉ. अमित) हैं जिनके पास कंपनी के पेटेंट का स्वामित्व है।

राजेश गुप्ता की टैक्स और इंश्योरेंस योजना:

1.Keyman Insurance:

कंपनी ने डॉ. अमित के जीवन पर ₹3 करोड़ की Keyman Policy ली।

 टैक्स लाभ:

कंपनी द्वारा दिया जाने वाला ₹5 लाख वार्षिक प्रीमियम कंपनी के बिजनेस खर्च (Business Expense) के रूप में टैक्स में छूट दिलाता है।

2.Personal Term Cover (MWP Act के तहत): 

राजेश ने अपने परिवार के लिए ₹5 करोड़ का टर्म इंश्योरेंस लिया और इसे MWP Act (Married Women's Property Act) के तहत रजिस्टर कराया।

 टैक्स लाभ:

राजेश Old Tax Regime में ₹1.5 लाख की 80C छूट लेते हैं। क्लेम की राशि सीधे उनकी पत्नी के ट्रस्ट में जाएगी और बैंक या बिजनेस देनदार इसे छु नहीं सकते।

3.Loan Protection Cover:

 ₹2 करोड़ के बैंक लोन के लिए कंपनी ने टर्म कवर लिया।


Common Mistakes: बिजनेस ओनर्स द्वारा की जाने वाली 7 आम गलतियाँ:

व्यवसाय मालिक द्वारा निम्नलिखित गलतियां होती है जिससे बचना चाहिए:

1.हर प्रीमियम को 80C में डिडक्टिबल मानना:

यह भूल जाना कि 80C की सीमा केवल ₹1.5 लाख है और प्रीमियम Sum Assured के 10% से अधिक होने पर अतिरिक्त प्रीमियम पर 80C का लाभ नहीं मिलता ।

2.Keyman Policy को सामान्य व्यक्तिगत पॉलिसी समझना:


Keyman Insurance के प्रीमियम पर कंपनी को खर्च की छूट मिलती है, लेकिन मैच्योरिटी पर मिलने वाला पैसा कंपनी के लिए बिजनेस इनकम बनकर टैक्स योग्य हो जाता है।

3. Section 10(10D) को बिना शर्त पूरी तरह कर-मुक्त मानना:

1 अप्रैल 2023 के बाद खरीदी गई ₹5 लाख से अधिक वार्षिक प्रीमियम वाली नॉन-यूलिप नीतियों पर मैच्योरिटी टैक्स-फ्री नहीं होती है।

4. Death Benefit पर टैक्स लगने की गलतफहमी रखना:

कई लोग सोचते हैं कि उच्च प्रीमियम नीतियों पर मृत्यु लाभ (Death Benefit) पर भी टैक्स लगेगा, जबकि कानूनन डेथ बेनिफिट हमेशा 100% कर-मुक्त रहता है।

5. Old और New Tax Regime के अंतर को नजरअंदाज करना:

New Tax Regime में 80C की छूट न मिलने के बावजूद कई बिजनेसमैन बिना गणना किए नीतियां खरीदते रहते हैं।

6. 2% TDS और Section 56(2)(xiii) की उपेक्षा करना:

कर योग्य मैच्योरिटी भुगतानों पर कटने वाले 2% TDS u/s 194DA का ध्यान न रखना।

7.MWP Act (Married Women's Property Act) का उपयोग न करना:

प्रोप्राइटर द्वारा ली गई नीतियों को बैंक या व्यावसायिक लेनदारों के क्लेम से सुरक्षित रखने के लिए MWP एड-ऑन न लेना।


निष्कर्ष (Conclusion):

बिजनेस ओनर्स के लिए जीवन बीमा केवल टैक्स बचाने का जरिया नहीं, बल्कि वित्तीय सुरक्षा और व्यावसायिक निरंतरता की रीढ़ है। 

नीतियां खरीदते समय केवल तत्कालीन टैक्स छूट (Section 80C) न देखें, बल्कि मैच्योरिटी के समय लागू होने वाले टैक्स नियमों (जैसे ₹5 लाख की सीमा, Section 10(10D), और Section 56(2)(xiii)) का गहराई से विश्लेषण करें। 

सही प्लानिंग आपको और आपके बिजनेस को किसी भी अप्रत्याशित वित्तीय संकट से सुरक्षित रख सकती है।

📚 स्रोत (Sources)


FAQs:(अक़्सर पूछे जाने वाले प्रश्न):

Q1: क्या Keyman Insurance का प्रीमियम बिजनेस एक्सपेंस (Business Expense) माना जाता है?

उत्तर: हाँ, नियोक्ता (Employer) द्वारा भुगतान किया गया Keyman Insurance का प्रीमियम आयकर अधिनियम के तहत पूरी तरह से व्यावसायिक खर्च (Business Expense) के रूप में डिडक्टिबल होता है।

Q2: Section 10(10D) के तहत ₹5 लाख की वार्षिक प्रीमियम सीमा क्या है?

उत्तर: 1 अप्रैल 2023 को या उसके बाद जारी की गई गैर-यूलिप जीवन बीमा पॉलिसियों के लिए, यदि किसी वित्तीय वर्ष में कुल वार्षिक प्रीमियम ₹5,00,000 से अधिक है, तो मैच्योरिटी राशि पर Section 10(10D) के तहत कर-छूट नहीं मिलती। हालांकि, मृत्यु लाभ (Death Benefit) हमेशा कर-मुक्त रहता है।

Q3: क्या न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) में जीवन बीमा प्रीमियम पर 80C का लाभ मिलता है?

उत्तर: नहीं, न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) में Section 80C के तहत टैक्स डिडक्शन उपलब्ध नहीं है। हालांकि, यदि पॉलिसी ₹5 लाख प्रीमियम सीमा के नियमों को पूरा करती है, तो उसकी मैच्योरिटी राशि Section 10(10D) के तहत न्यू टैक्स रिजीम में भी कर-मुक्त रहेगी ।

Q4: ULIP में ₹2.5 लाख से अधिक प्रीमियम होने पर टैक्स कैसे लगता है?

उत्तर: 1 फरवरी 2021 के बाद जारी ULIPs में यदि वार्षिक प्रीमियम ₹2.5 लाख से अधिक है, तो 10(10D) की छूट नहीं मिलती और उससे होने वाले लाभ को इक्विटी या डेट फंड के अनुसार Capital Gains के रूप में टैक्स किया जाता है।

Q5: यदि जीवन बीमा मैच्योरिटी कर योग्य (Taxable) है, तो TDS किस दर से कटता है?

उत्तर: यदि मैच्योरिटी की राशि Section 10(10D) के तहत कर-मुक्त नहीं है, तो बीमा कंपनी भुगतान के समय निवासियों के लिए Section 194DA के तहत 2% की दर से TDS काटती है ।

आप से सवाल :

क्या आप बिज़नेस ऑनर है? क्या अपने keyman Insurance करवाया है? अपना उत्तर कॉमेंट में लिखें। लेख जानकारी पूर्ण लगे तो शेयर और सबस्क्राइब करें।


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