Insurance Company Claim Delay करे तो क्या करें? Claim अटकने पर पूरी प्रक्रिया, शिकायत और IRDAI Rules 2026

Insurance Company Claim Delay करे तो क्या करें? GRO, Bima Bharosa और Ombudsman

Insurance Company Claim Delay होने पर क्या करें GRO Bima Bharosa और Insurance Ombudsman की जानकारी
Insurance Claim में देरी या Rejection होने पर GRO, Bima Bharosa और Insurance Ombudsman के जरिए शिकायत करने की प्रक्रिया समझें।


जितना जरूरी बीमा होता है उतना ही आवश्यक होता है बीमा को समय पर claim को बीमा धारक या उसके परिवार को प्राप्त होना।

क्या अपने सोचा है कि claim file करने के बाद भी क्लेम क्यों अप्रूव नहीं हुआ? क्यों बार बार भिन्न भिन्न प्रकार के दस्तावेज मागें जाते हैं? बीमा बैकग्राउंड चेकिंग में देरी होती है या claim अप्रूवल के बाद भी पैसे अकाउंट में नहीं आए।

इसके कई वैध या अवैध कारण हो सकते हैं अतः केवल बीमा कंपनी को फोन करने या ईमेल करने से claim जल्दी प्राप्त नहीं होगा इसके लिए लिखित शिकायत, Grievance Redressal Officer (GRO), Bima Bharosa और जरूरत पड़ने पर Insurance Ombudsman तक जाने का रास्ता मौजूद है।

IRDAI के 2024 पॉलिसी गाइडलाइन में बीमा प्रदाता को तय समय सीमा में क्लेम प्रोसेस करने , claim के स्टेस की जानकारी देने और बार बार अनावश्यक दस्तावेज न मांगने की सलाह दी गई है।

इस लेख में हम जानेंगे insuranc claim delay होने पर क्या करें insurance claim rejecte होने पर क्या करें इन दोनों में क्या अंतर है।


🛡️ Insurance Claim Delay करे तो क्या करें?

अगर Insurance Company आपका claim समय पर settle नहीं करती है, तो सबसे पहले insurer के Grievance Redressal Officer (GRO) को लिखित शिकायत करें और complaint number/acknowledgement सुरक्षित रखें।

शिकायत का समाधान न होने या जवाब से संतुष्ट न होने पर Bima Bharosa के जरिए IRDAI में शिकायत की जा सकती है। इसके बाद पात्र मामले में Insurance Ombudsman से संपर्क किया जा सकता है।

🏥 Health Insurance Claim TAT

Cashless Pre-authorisation
1 घंटा
निर्णय के लिए
Final Discharge Authorisation
3 घंटे
Final approval के लिए
Non-Cashless Health Claim
15 दिन
Settlement TAT

❤️ Life Insurance Death Claim TAT

Investigation की जरूरत नहीं
15 दिन
Death Claim Settlement TAT
Investigation आवश्यक
45 दिन
Death Claim Settlement TAT
⏱️ Claim Settlement में निर्धारित समय से देरी
Bank Rate + 2%

Applicable regulatory framework के अनुसार निर्धारित समय के बाद claim settlement में देरी होने पर applicable interest का प्रावधान हो सकता है।

📌 Claim Delay होने पर यह 4 Steps अपनाएं

1️⃣ GRO
Insurer के GRO को लिखित शिकायत करें।
2️⃣ Record रखें
Complaint number और acknowledgement सुरक्षित रखें।
3️⃣ Bima Bharosa
समाधान न मिले तो grievance escalate करें।
4️⃣ Ombudsman
पात्र मामले में Insurance Ombudsman से संपर्क करें।
नोट: Claim settlement का वास्तविक समय insurance type, claim circumstances, documents, investigation और applicable regulatory rules पर निर्भर कर सकता है। Interest का calculation भी applicable rules के अनुसार किया जाना चाहिए।

Insurance Claim में Delay क्या माना जाता है?

कभी भी क्लेम करने पर अगर 10 से 20 दिन का समय लगता है तो उसको क्लेम delay मानना गलत हो सकता है।

विभिन्न प्रकार केबीमा के विभिन्न प्रकार की पॉलिसी का क्लेम प्रॉसेस की समय सीमा भिन्न होती हैं अतः किसी पॉलिसी का जल्दी क्लेम आने से और दूसरी को कुछ देरी होने से क्लेम को delay नहीं समझना चाहिए।

उदाहरण के लिए अगर हेल्थ इंश्योरेंस की बात की जाए तो इसमें कैशलेश क्लेम और रिबेर्समेंट क्लेम की प्रक्रिया अलग होती है।

उसी तरह जीवन बीमा में मेच्योरटी क्लेम और डेथ क्लेम की प्रक्रिया भिन्न है। डेथ क्लेम में यह प्रक्रिया थोड़ी देरी से हो सकती है क्योंकि investigation में समय लग सकता है।

क्लेम delay को जानने के लिए निम्नलिखित बातों को देखना होता है:

1. आपकी insurance policy में claim settlement का पूरा करने का समय सीमा क्या है?

2. संबंधित insurance category के लिए IRDAI का applicable कार्य पूरा करने की निर्धारित समय-सीमा क्या है?

3. क्या insurer ने investigation या कोई वैध अतिरिक्त प्रक्रिया शुरू की है?


इंश्योरेंस क्लेम डिले: महत्वपूर्ण डेटा:

📊 Insurance Claim Delay: Important Data
Insurance Claims के प्रमुख TAT और Grievance Timelines
Insurance Claim Type सामान्य / निर्धारित TAT
🏥 Health Cashless Pre-authorisation अधिकतम 1 घंटा
🏥 Health Cashless Final Authorisation अधिकतम 3 घंटे
🏥 Health Non-Cashless Claim 15 दिन
❤️ Life Death Claim – बिना Investigation 15 दिन
🔍 Life Death Claim – Investigation आवश्यक 45 दिन
💰 Life Surrender / Partial Withdrawal 7 दिन
📅 Life Maturity / Survival Benefit Due Date
📝 Insurance Company Grievance 14 दिन
⚖️ Insurance Ombudsman Award 3 महीने तक
✅ Ombudsman Award का पालन 30 दिन
📌 महत्वपूर्ण नोट:
अलग-अलग insurance products और परिस्थितियों में applicable TAT policy wording और current regulatory instructions के अनुसार अलग हो सकता है। Health claim TAT के लिए IRDAI की consumer guidance में 1 घंटे, 3 घंटे और 15 दिन के norms दिए गए हैं; life claims के लिए 15/45 दिन का framework लागू होता है।

Insurance Company Claim क्यों रोकती या Delay करती है?

Insurance company claim delay करने के कई करना हो सकता है, कुछ कानूनी या वाजिब कारण हो सकता है तो कुछ आवश्यक और गैर कानूनी करना हो सकता है।

हर स्थिति में केवल Insurance company ही गलत नहीं होती कुछ स्थितियों में ग्राहक की भी गलती हो सकती है क्लेम delay के कई कारणों में से कुछ कारण निम्नलिखित हो सकते हैं:

1. Documents अधूरे होना:

कभी कभी ग्राहक के द्वारा क्लेम फॉर्म (हर प्रकार के बीमा में) मेडिकल रिपोर्ट्स (टर्म और हेल्थ या मोटर इंश्योरेंस), डिस्चार्च summary (अधिकतम Health Insurance में) FIR, मृत्यु प्रमाण पत्र या हॉस्पिटल बिल जैसे अन्य आवश्यक डॉक्यूमेंट नहीं जमा किया गया होता है या अधूरा, गलत दस्तावेज जमा किया गया होता है।

लेकिन IRDAI निर्देशित करता है कि बीमा कम्पनी बाध्य है कि वह ग्राहक को स्पष्ट दस्तावेज की सूची बताए।

2. Investigation:

अगर मृत्यु के मामले में बीमा कंपनी को जांच की जरूरत लगे, तो क्लेम की प्रक्रिया सामान्य क्लेम की तुलना में ज्यादा समय ले सकती है।

इसका कारण है जांच का इकोसिस्टम को पूर्ण करने में समय लगता है इस कारण क्लेम की प्रक्रिया में देरी होती है।

IRDAI के master circular में ऐसे death claims के लिए 45 दिन का समय सीमा निर्धारित किया गया है।

3. Surveyor की जरूरत:

अक्सर कुछ बीमा के प्रकार में जैसे मोटर बीमा, प्रॉपर्टी बीमा या दूसरे प्रकार के जनरल बीमा में क्लेम प्रक्रिया पूरी करने हेतु सर्वे निरीक्षक की आवश्यकता होती है।

निरीक्षण प्रक्रिया पूरी होने में कुछ समय लगने की संभावना बनी रहती है जिसके कारण claim सेटलमेंट प्रक्रिया धीमी हो जाती है।

4. Policy terms और coverage की जांच:

कई बार ऐसा होता है कि बीमा कवर में न आने वाली घटनाएं हो जाती है, लेकिन ग्राहक को जानकारी न होने के कारण वह क्लेम आवेदन कर देता है।

अतः बीमा संस्थान उस घटना की जाँच कर सकता है कि क्लेम आवेदन में किया गया घटना क्या कवरेज के अंतर्गत आता भी है या नहीं ।



Insurance Company Claim क्यों रोकती या Delay करती है?

Insurance company claim delay होने के 4 प्रमुख कारण

बीमा क्लेम में देरी के प्रमुख कारणों में अधूरे दस्तावेज, जांच, सर्वेयर की जरूरत और पॉलिसी कवरेज की जांच शामिल हो सकती है।


उदाहरण के लिए:

exclusion(coverage के बाहर की घटना):

कुछ परिस्थितियां बीमा कवरेज के बाहर की होती है इसमें बीमा कंपनी क्लेम देने के लिए बाध्य नहीं होती है।

waiting period:

वेटिंग पीरियड के अंतर्गत होने वाली घटनाएं में क्लेम नहीं मिलता है।

policy lapse:

कुछ बीमा प्रकार में पॉलिसी के पेमेंट में लेप्स होने पर क्लेम रिजेक्ट या डिले हो सकता है।

pre-existing condition:

प्रोटेक्शन जैसे बीमा में अगर ग्राहक pre-existing बीमारियों को छुपा लेते हैं अतः इस स्थिति में क्लेम रुक सकता है या रिजेक्ट हो सकता है।इस तरह के कई परिस्थितियों में बीमा डिले हो सकता है।


सबसे पहले क्या करें? Customer Care पर फोन या Written Complaint?


जब भी insurance claim delay होता है तो ग्राहक को सबसे पहले कॉल करना चाहिए उसके बाद ईमेल फिर भी शिकायत नहीं सुनी जाती तो written शिकायत करने की आवश्यकता होती है।

क्योंकि फोन पर जब बात किया जाता है तो कंपनी के कस्टमर केयर से बात होती है और ग्राहक के पास कोई मजबूत रिकॉर्ड नहीं होता कि ग्राहक ने कोई कंप्लेन किया है या नहीं।

ईमेल द्वारा किया गया शिकायत का रिकॉर्ड हमेशा ईमेल के sent बॉक्स में सुरक्षित रहता है जिसे ज़रूरत पड़ने पर दिखाया जा सकता है परंतु इससे भी साबित नहीं होता कि ग्राहक ने ही ईमेल किया है।

Writen कंप्लेन में ग्राहक का हस्ताक्षर भी होता है अतः यह सबसे अच्छा प्रमाण होता है।

इसलिए:

Call → Email → Written Complaint → Complaint Number

इस sequence को अपनाना बेहतर है।

जब भी ग्राहक शिकायत  करता है तो निम्नलिखित बातों को शिकायत पत्र में आवश्य लिखें:

Policy Number

Claim Number

Claim Intimation Date

Claim Amount

Claim Type

Documents Submitted

शिकायत पत्र देने तक क्लेम की स्थिति क्या है।

कितने दिनों से claim pending है

आपकी मांग क्या है और सबसे जरूरी बात complaint acknowledgement जरूर रखें।

शिकायत करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन किया जाता है:

Step 1: Insurance Company के GRO को शिकायत करें

Insurance company के पास शिकायत निवारण अधिकारी  (GRO) होते हैं, जिनका काम पॉलिसी से संबंधित किसी भी प्रकार की शिकायत को सुनकर ग्राहक को हल बताना होता है।

सबसे पहले औपचारिक शिकायत GRO के माध्यम से करना ही ऊंचित होता है।

IRDAI के BIMA BHROSA के FAQ सेक्शन के अनुसार बीमा धारक को सबसे पहले बीमा कंपनी के शिकायत निवारण अधिकारी (grievance redressal officer) को लिखित शिकायत देनी चाहिए 

IRDAI के नवीनतम दिशा निर्देश के अनुसार बीमा कम्पनी को ग्राहक के शिकायत पत्र का निवारण 14 दिनों के अन्दर करना चाहिए।

Step 2: Claim Status लिखित में मांगें:

शिकायत पत्र देने के पश्चात कुछ दिनों बाद शिकायत निवारण का प्रगति रिपोर्ट बीमा प्रदाता से पूछें, अगर बीमा कम्पनी के द्वारा यह बताया जाता है कि कंप्लेन अंडरप्रोसेस है तो इस का लिखित में जवाब की मांग करें।

कंपनी को ईमेल द्वारा पूछे “मेरे claim की वर्तमान स्थिति क्या है और pending होने का specific reason क्या है?” ,साथ में पूछें कौन सा document pending है?,

क्या investigation चल रही है? ,survey report pending है? ,claim approval हो चुका है? ,payment release हुआ है? अगर payment release हुआ है तो UTR number क्या है? इससे आपके पास आगे की शिकायत के लिए evidence तैयार होगा।

Step 3: अगर Claim Approved है लेकिन पैसा नहीं आया:

यह परिस्थिति कुछ अलग है।

मान लीजिए insurer ने आपको email भेजकर बताया:

Claim approved – ₹2,00,000

लेकिन कई दिन बीतने के बाद भी आपके bank account में पैसा नहीं आया।

ऐसी स्थिति में insurer से लिखित रूप से पूछें:

“Payment release date और UTR number उपलब्ध कराएं।”

अगर भुगतान वास्तव में release नहीं हुआ है और लागू नियमा अनुसार समय सीमा पार हो चुकी है, तो भुगतान देरी पर लागू ब्याज दर का दावा भी बन सकता है।

IRDAI के 2024 master circular में लागू सेटलमेंट भुगतान समय सीमा miss होने पर bank rate + 2% की दर से ब्याज दर का प्रावधान दिया गया है और इसे बीमा कंपनी के द्वारा द्वारा स्भुवतः गतान किए जाने की बात कही गई है। 

📊 भारत में Health Claims Settlement
IRDAI Annual Report 2024-25 के अनुसार
Health Claims Settled
3.26 करोड़
FY 2024-25
Claim Amount Paid
₹94,248 करोड़
Claims Settlement
Settled Claims
लगभग 87%
Registered Claims में
Quick Statistics FY 2024-25
🏥 Health Claims Settled लगभग 3.26 करोड़
💰 Claim Amount Paid लगभग ₹94,248 करोड़
✅ Settled Claims लगभग 87%
❌ Repudiated Claims करीब 8%
⏳ Pending Claims करीब 5%
📈 Average Amount per Claim लगभग ₹28,910
📊 Registered Claims का Status
87% Settled
8%
5%
🟢 Settled — 87% 🔴 Repudiated — 8% 🟠 Pending — 5%
💡 आंकड़ों का मतलब क्या है?
FY 2024-25 में General और Health Insurers द्वारा लगभग 3.26 करोड़ health claims settle किए गए और करीब ₹94,248 करोड़ की claim राशि का भुगतान हुआ। Registered claims में लगभग 87% claims settle, करीब 8% repudiated और लगभग 5% claims pending थे।
📌 महत्वपूर्ण नोट: ये industry-level आंकड़े हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि किसी particular insurer का claim settlement performance भी बिल्कुल ऐसा ही होगा। Claim settlement किसी insurer, policy, claim type, documents और applicable terms के अनुसार अलग हो सकता है।
Source: IRDAI Annual Report 2024-25

क्या Claim Delay होने पर Interest मिलता है?


कुछ परिस्थितियों में हाँ।

यह एक बहुत महत्वपूर्ण  बीमा धारक का अधिकार है।

IRDAI के 2024 master circular में health/general और life claims के applicable timelines miss होने पर bank rate + 2% interest का प्रावधान दिया गया है। 

लेकिन यहां एक सावधानी जरूरी है:

Interest calculation claim type और applicable regulatory TAT(समय सिमा)के अनुसार करनी चाहिए।

इसलिए केवल “15 दिन हो गए इसलिए interest मिलेगा” ऐसा blindly assume न करें।

पहले यह देखें कि:

claim किस प्रकार का है?

required documents कब पूरे हुए?

claim intimation कब हुआ?

applicable TAT क्या है?

कोई investigation/survey चल रहा है?

policy और regulatory framework में क्या provision है?

Claim Delay Calculator:


आप इस article में नीचे दिया गया Insurance Claim Delay calculator की मदद ले सकते हैं।इससे आप claim amount, delay days और applicable interest rate डालकर estimated delayed interest देख सकता है।

 ध्यान दें: यह केवल estimation tool है, legal determination नहीं

🧮 Insurance Claim Delay Calculator

Claim amount और delay के आधार पर अनुमानित interest देखें

Disclaimer: यह calculator केवल अनुमान के लिए है। वास्तविक interest और claim settlement आपकी policy, applicable IRDAI rules तथा claim circumstances पर निर्भर करेगा।


Insurance Claim Delay Calculator – Claim Delay Interest Estimate
Insurance Claim Delay Calculator से claim delay और अनुमानित interest की गणना
Insurance Claim Delay Calculator से claim amount, delay और interest rate के आधार पर अनुमानित interest देखें।

Step 4: Bima Bharosa में Complaint करें:

अगर बीमा प्रदाता के GRO से शिकायत का समाधान नहीं होता या response संतोषजनक नहीं है, तो अगला महत्वपूर्ण रास्ता Bima Bharosa है।

IRDAI का Bima Bharosa portal बीमा शिकायत को register और track करने के लिए बनाया गया है।

 Complaint register होने पर एक token number मिलता है, जिससे complaint का status track किया जा सकता है। 

Official Bima Bharosa:

[Bima Bharosa पर शिकायत दर्ज करें]

IRDAI के अनुसार grievance के लिए 155255 या 1800 4254 732 पर भी संपर्क किया जा सकता है। 

महत्वपूर्ण सावधानी:

Bima Bharosa complaint करने के लिए आपसे कोई payment नहीं मांगता। IRDAI ने विशेष रूप से चेतावनी दी है कि complaint के नाम पर किसी QR code को scan न करें और किसी unknown link से payment/disbursement process न करें। 


Step 5: Insurance Ombudsman कब जाएं?

अगर बीमा प्रदाता के साथ शिकायत process के बाद भी समस्या हल नहीं होती, तो पात्र मामले में Insurance Ombudsman एक महत्वपूर्ण विकल्प है।

Council for Insurance Ombudsmen के अनुसार क्लेम सेटलमेंट में देरी partial/total repudiation, policy servicing और कुछ अन्य बीमा विवाद Ombudsman के न्यायिक क्षेत्र में आ सकते हैं। 

Ombudsman जाने से पहले

आम तौर पर आपको:

1. पहले insurer/insurance broker को complaint करनी चाहिए।

2. insurer का response लेना चाहिए।

3. response संतोषजनक नहीं है तो Ombudsman approach किया जा सकता है।

4. अगर insurer ने reply नहीं दिया तो prescribed waiting period लागू होता है।

5. complaint applicable time limit के अंदर होनी चाहिए।

6. उसी matter को पहले से court/consumer forum/arbitrator में लेकर नहीं गए हों।

CIO की current procedure के अनुसार insurer/broker को complaint के लिए 30 दिन तक का समय दिया जाता है।

Response न मिलने या समाधान से असंतुष्ट होने पर पात्र शिकायत Ombudsman के पास की जा सकती है। Compensation/claim value की सीमा ₹50 लाख तक है। 

Insurance Ombudsman के लिए कौन-कौन से Documents रखें?

Insurance Ombusdsman के पास जाने से पहले निम्नलिखित दस्तावेज अपने पास सुरक्षित रखें:

Insurance policy

Policy schedule

Claim form

Claim acknowledgement

Claim number

सभी submitted documents

Medical reports

Hospital bills

Discharge summary

FIR, अगर applicable हो

Survey report, अगर उपलब्ध हो

Insurer के emails

SMS/screenshots

Repudiation/denial letter

Partial settlement letter

GRO complaint

GRO response

Bima Bharosa complaint number

CIO की official information में policy copy, insurer को भेजी गई representation, rejection/repudiation/partial settlement letter और अन्य correspondence जैसे documnts का उल्लेख है। 

 Insurance Claim Complaint Letter Generator


📝 Insurance Claim Complaint Letter Generator

Disclaimer: यह केवल complaint draft तैयार करने का tool है। वास्तविक शिकायत भेजने से पहले policy documents और claim records की जांच करें।Ctr boost pheacherd image prompt with alt name title coption 


अगर इंश्योरेंस कंपनी क्लेम reject कर दे तो ?

क्लेम रिजेक्शन और क्लेम delay दोनों अलग अलग विषय है अगर बीमा कम्पनी क्लेम रिजेक्ट करता है तो केवल क्लेम रिजेक्टेड, लिखे हुए ईमेल देख कर रुकना नहीं चाहिए आप अन्य लिखित कारण और लेटर मांगे ।

इसमें individually ये स्पष्ट होना चाहिए कि Claim क्यों rejected हुआ ,कौन सा पॉलिसी close नियम लागू हुआ ,कौन से फैक्ट के आधार पर रिजेक्शन हुआ ,कौन से document/evidence पर यह निर्णय आधारित है 

अगर रिजेक्शन आपको गलत लग रहा है तो बीमा कंपनी के शिकायत प्रणाली में अपनी बात रखें।

उसके बाद ज़रूरत पड़ने पर बीमा bharosa और पात्र मामलों में insurance obaddam का रास्ता उपलब्ध है 

क्या सीधा कोर्ट जाना चाहिए ?

हर claim विवाद में कोर्ट जाना ज़रूरी नहीं है 

पहले उपलब्ध internal grivance machnusam और regulatry gruvance chainal इस्तमाल करना चाहिए 

एक महत्वपूर्ण बात यह है कि Insurance obasdan के सामने उस विषय या मामला पर सुनवाई नहीं होता जिस पर proseding पहले से court ,cinsumer forum  के सामने पहले पेंडिंग हो या डिस्पोज हो चुका हो इस लिए इस मार्ग पर समझ कर आगे बढ़ना चाहिए 

Claim delay होने पर क्या क्या evedanve रखें 

क्लेम डिले होने पर निम्नलिखित साक्ष्य को अपने पास रखना चाहिए:

1 aug : claim intimation 

2 aug क्लेम एक्नॉलेजमेंट 

5aug document submitted 

10 insurer ने extra documents मंगा 

11 aug document submited 

20 aug staus enquiry 

25 aug written complaint 

Gro response ऐसे टाइमलाइन बनाने से पूरी कहानी सामने आ जाती है आही आगे बीमा भरोसा या obsdam complant में काफी काम आता है 

Claim Delay से बचने के लिए 10 जरूरी Tips:

बीमा धारक क्लेम डिले जैसी परिस्थितियों से बचने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:

1. Claim  के लिए तुरंत आवेदन करें:

घटना होने के बाद policy के अनुसार जितनी जल्दी संभव हो बीमा कम्पनी को सूचित करें।

हालांकि IRDAI के दिसा निर्देश के अनुसार देरी से क्लेम का आवेदन या दस्तावेजों की कमी को क्लेम रिजेक्शन का कारण नहीं बताया गया है।

फिर भी बीमा धारक को सलाह दिया जाता है कि घटना के तुरन्त बाद बीमा प्रदाता के आधिकारिक विभाग को सूचित करें।

 इससे जरूरी होने पर पेंडिंग जांचें जल्दी हो जाएगी और claim delay नहीं होगा।

2. Claim number जरूर लें:

हमेशा अगर आप शिकायत करते हैं तो कम्पनी के कर्मचारी से Claim number की मांग आवश्य करें।

फोन पर केवल complaint करने के बजाय claim reference number प्राप्त करना समझदारी होती है।

3. Documents की list बनाएं:

हर प्रक्रिया जो आपके द्वारा किया जा रहा है और हर दस्तावेज जो आप बीमा कंपनी को दे रहे हैं उसका रिकॉर्ड आवश्य रखे।

4. Email communication रखें

जहां संभव हो email से confirmation लें। इससे बातचीत डिजिटली सुरक्षित रहती है।

5. “Under Process” का कारण पूछें

जब भी बीमा कंपनी द्वारा under process की बात की जाए तो आपको इसका कारण पूछना चाहिए।सिर्फ status नहीं, specific reason मांगें।

6. Surveyor की details रखें

Motor/property claim में surveyor का नाम, appointment date और survey date note करें।

7. Approved claim का UTR मांगें

Payment release होने का proof लें।

8. GRO को लिखित complaint दें

यह escalation का महत्वपूर्ण पहला step है।

9. Bima Bharosa token सुरक्षित रखें

Complaint number आगे tracking में काम आता है।

10. Ombudsman की deadline न भूलें

CIO के अनुसार eligible complaint को rejection/decision या applicable waiting period के बाद एक वर्ष के भीतर Ombudsman तक ले जाने का समय होता है। 

बीमा क्लेम में देरी होने पर शिकायत आगे बढ़ाने की पूरी प्रक्रिया

🛡️ Insurance Claim Complaint Process
Claim Delay या Rejection होने पर Step-by-Step Process
STEP 1
📄 Claim Filed
Insurance company में claim दर्ज करें।
STEP 2
🔢 Claim Number लें
Claim acknowledgement और claim number सुरक्षित रखें।
STEP 3
📑 Documents Complete करें
सभी जरूरी documents, bills और reports जमा करें।
STEP 4
📞 Claim Status लिखित में पूछें
Email या official channel से claim status और pending documents पूछें।
STEP 5
📝 Insurance Company के GRO को Complaint
Claim delay या rejection के खिलाफ written grievance दर्ज करें।
STEP 6
⏱️ 14 दिन के Grievance Timeline पर नजर रखें
Complaint acknowledgement और response को सुरक्षित रखें।
STEP 7
🏛️ Bima Bharosa / IRDAI
Insurer grievance से समाधान न मिलने पर applicable grievance mechanism का उपयोग करें।
STEP 8
⚖️ Eligible Case में Insurance Ombudsman
Eligibility और applicable conditions पूरी होने पर Ombudsman का विकल्प देखें।
STEP 9
⚖️ जरूरत पड़ने पर अन्य कानूनी Remedy
Complex या high-value dispute में योग्य legal professional से सलाह लें।
📌 याद रखें
हर complaint का acknowledgement, complaint number, email और insurer का written response सुरक्षित रखें।
नोट: Grievance और Ombudsman की timelines तथा eligibility case और applicable regulatory framework के अनुसार अलग हो सकती हैं। Complaint करने से पहले current applicable rules जरूर देखें।
स्वयं IRDAI इस बात को कहता है कि सबसे पहले बीमा प्रदाता के शिकायत निवारण विभाग के पास शिकायत करना चाहिए। यहां पर अगर ग्राहक को समाधान प्राप्त नहीं होता है।

तब BIMA BHAROSA/IRDAI शिकायत निवारण प्रणाली का उपयोग सही प्रक्रिया है।

Insurance Claim Delay पर सबसे बड़ी गलती क्या है?

ग्राहक द्वारा इंश्योरेंस क्लेम देरी होने पर सबसे बड़ी गलती एजेंट पर अत्यधिक भरोसा होता है। ग्राहक को आसा होती है कि एजेंट द्वारा प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

परन्तु Claim settlement केवल agent के भरोसे छोड़ना सही नहीं  होता है। 

यह सही है कि एजेंट ग्राहक को क्लेम प्रक्रिया में मदद कर सकता है, किंतु ग्राहक को भी बीमा कंपनी के क्लेम सेटलमेंट विभाग से व्यक्तिगत संपर्क बनाए रखना चाहिए।

इस प्रक्रिया में अपनाई जाने वाली दूसरी गलती यह होती है कि बीमा धारक कई बार क्लेम दस्तावेज को सुरक्षित नहीं रखता है।

तीसरी गलती यह होता है कि बीमा धारक कम्पनी से रिजेक्शन और डिले का लिखित करना नहीं मांगता है।

निष्कर्ष: 

Insurance claim delay और insurance claim rejecte होना उपभोक्ता के लिए सबसे पीड़ा का विषय होता है। 

अक्सर लोग इस स्थिति मेंघबरा जाते हैं लेकिन उपभोक्ता को चाहिए कि इस स्थित से IRDAI द्वारा क्लेम से संबंधित गाइड लाइन स्पष्ट किया गया है उसको पालन करके इस प्रकार की परेशानियों से बचा जा सकता है।

सबसे पहले अपनी गलतियों को जानने की कोशिश करें, तपश्चात बीमा किस प्रकार का है यह स्पष्ट करें फिर इसपर कौन सा नियम लागू होता है जाने।

क्लेम document और कम्युनिकेशन का रिकॉर्ड रखना जरूरी होता है। अगर क्लेम में देरी होती है उसके बाद बीमा कंपनी के शिकायत निवारण अधिकारी से लिखित में पत्राचार करें उसके बाद भी अगर शिकायत का समाधान नहीं मिलता तब आगे की कार्रवाई करें।

📚 स्रोत (Sources)


FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)


Q.1. Insurance company claim settle नहीं कर रही है तो क्या करें?

A. पहले insurer के Grievance Redressal Officer को written complaint दें। समाधान न मिलने पर Bima Bharosa के जरिए IRDAI में grievance escalate किया जा सकता है।

Q.2. Health insurance reimbursement claim कितने दिन में settle होना चाहिए?

A . IRDAI की current health guidance में non-cashless health claims के लिए 15 दिन का TAT दिया गया है। 

Q.3. Health cashless claim में कितना समय लगता है?

A .Cashless pre-authorisation के लिए insurer को अधिकतम 1 घंटे और final discharge authorisation के लिए 3 घंटे का TAT दिया गया है। 

Q.4. Life insurance death claim कितने दिन में मिलता है?

A . Investigation की जरूरत नहीं होने वाले death claim के लिए 15 दिन और investigation वाले death claim के लिए 45 दिन का TAT दिया गया है। 

Q.5. Claim में देरी होने पर क्या interest मिलता है?

A. Applicable circumstances में specified timeline के बाद claim settlement में देरी होने पर bank rate + 2% interest का provision है। 

आप से सवाल:

आपको क्या लगता है insurance claim डिले या रिजेक्ट होने पर क्या करना चाहिए? अपना उत्तर कॉमेंट में दर्ज करें। लेख जानकारी पूर्ण लगा तो शेयर और सब्सक्राइब ज़रूर करें।


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ