Secured Loan vs Unsecured Loan in Hindi: अंतर, नियम व फायदे


Secured Loan vs Unsecured Loan: अंतर, नियम व फायदे

Secured Loan vs Unsecured Loan in Hindi: अंतर, नियम और फायदे
Secured Loan और Unsecured Loan में ब्याज दर, जमानत, लोन राशि, अवधि और नियमों का आसान तुलना चित्र।


जीवन के विभिन्न पड़ावों पर वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए लोन एक महत्वपूर्ण साधन बनता है। चाहे घर खरीदना हो, उच्च शिक्षा प्राप्त करनी हो, व्यवसाय का विस्तार करना हो या अचानक आए चिकित्सीय खर्चों से निपटना हो सही लोन विकल्प चुनना वित्तीय स्थिति को संतुलित रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली में ऋण मुख्य रूप से दो श्रेणियों में विभाजित होते हैं: सुरक्षित ऋण (Secured Loan) और असुरक्षित ऋण (Unsecured Loan)। 

दोनों प्रकार के लोन में जमानत (Collateral), ब्याज दर (Interest Rate), जोखिम (Risk Factor), पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria) और पुनर्भुगतान की शर्तों (Repayment Terms) में बुनियादी अंतर होता है। 

बैंक या गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) से लोन लेते समय इन अंतरों को समझना आपके वित्तीय बजट और जोखिम प्रबंधन के लिए बेहद जरूरी है

🔎 Secured Loan और Unsecured Loan में क्या मुख्य अंतर है?

Secured Loan (सुरक्षित ऋण) वह लोन है जिसके लिए बैंक या लेंडर के पास जमानत (Collateral) जैसे संपत्ति, सोना या एफडी रखनी होती है, जिससे ब्याज दर कम और लोन अवधि लंबी होती है।

वहीं, Unsecured Loan (असुरक्षित ऋण) बिना किसी जमानत के केवल आवेदक की क्रेडिट हिस्ट्री, आय और सिबिल स्कोर (CIBIL Score) के आधार पर दिया जाता है, जिससे इसकी ब्याज दर अपेक्षाकृत अधिक होती है।

🟢 Secured Loan
Collateral जरूरी • कम ब्याज • लंबी अवधि
🔴 Unsecured Loan
Collateral नहीं • अपेक्षाकृत अधिक ब्याज • छोटी अवधि
💡 ध्यान दें: वास्तविक ब्याज दर, लोन राशि, अवधि और पात्रता बैंक/NBFC, आवेदक की प्रोफाइल और संबंधित लोन की शर्तों पर निर्भर करती है।


Secured Loan (सुरक्षित ऋण) क्या है?

इस loan को निम्नलिखित तथ्यों द्वारा समझा जा सकता है:

अर्थ और कार्यप्रणाली:

Secured Loan वह वित्तीय ऋण है जिसमें उधारकर्ता (Borrower) को लोन राशि की सुरक्षा के रूप में लेंडर (बैंक या NBFC) के पास कोई मूल्यवान संपत्ति जमानत/बंधक (Collateral/Mortgage) के रूप में रखनी पड़ती है। 

यदि उधारकर्ता किसी कारणवश लोन चुकाने में असमर्थ रहता है, तो लेंडर को बंधक रखी गई संपत्ति को बेचकर या नीलाम करके अपनी बकाया राशि वसूलने का कानूनी अधिकार होता है।

प्रमुख उदाहरण:

इस तरह के लोन के उदाहरण निम्नलिखित हैं:

Home Loan (होम लोन): 

घर खरीदने या निर्माण के लिए दिया जाने वाला लोन, जिसमें खरीदा जाने वाला मकान ही बैंक के पास बंधक रहता है।

Loan Against Property - LAP (संपत्ति पर लोन): 

अपनी मौजूदा आवासीय या वाणिज्यिक संपत्ति को गिरवी रखकर लिया जाने वाला लोन।

Gold Loan (गोल्ड लोन):

सोने के आभूषणों या सिक्कों को बैंक के पास जमा करके लिया जाने वाला त्वरित ऋण। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के अनुसार बैंकों द्वारा गोल्ड लोन में लोन-टू-वैल्यू (LTV) अनुपात अधिकतम 75% तक रखा जाता है।

Vehicle Loan (वाहन ऋण):

कार या बाइक खरीदने के लिए लिया गया लोन, जिसमें वाहन का हाइपोथिकेशन बैंक के नाम होता है।

फायदे (Benefits):

इस तरह के लोन के निम्नलिखित फायदे हैं:

कम ब्याज दर:

लेंडर के पास सुरक्षा (Collateral) होने के कारण जोखिम कम रहता है, जिससे ब्याज दरें कम होती हैं।

बड़ी लोन राशि:

संपत्ति के मूल्यांकन (Valuation) के आधार पर बड़ी राशि स्वीकृत हो सकती है।

लंबी अवधि (Long Tenure):

होम लोन जैसे मामलों में पुनर्भुगतान की अवधि 15 से 30 वर्ष तक हो सकती है।

आसान स्वीकृति:

यदि जमानत की गुणवत्ता अच्छी है, तो मामूली क्रेडिट स्कोर वाले आवेदकों को भी लोन मिल सकता है।

सीमाएं (Limitations):

इस तरह के लोन के निम्नलिखित सीमाएं है:

संपत्ति खोने का जोखिम:

डिफॉल्ट होने की स्थिति में आपकी जमा संपत्ति (घर, सोना या गाड़ी) लेंडर द्वारा जब्त की जा सकती है।

लंबी कागजी कार्रवाई:

संपत्ति के कानूनी सत्यापन (Legal Verification) और मूल्यांकन (Valuation) में अधिक समय लगता है।


Unsecured Loan (असुरक्षित ऋण) क्या है?

Unsecured Loan के तथ्य जानें:

अर्थ और कार्यप्रणाली

Unsecured Loan वह ऋण है जिसके लिए किसी भी प्रकार की संपत्ति या जमानत (Collateral) गिरवी रखने की आवश्यकता नहीं होती। लेंडर यह लोन पूरी तरह से आवेदक की आय क्षमता, रोजगार की स्थिरता, क्रेडिट इतिहास और **सिबिल स्कोर (CIBIL Score)** के आधार पर मंजूर करता है [3, 4]।

प्रमुख उदाहरण:

इस तरह के लोन के उदाहरण निम्नलिखित दिया गया है:

Personal Loan (पर्सनल लोन):

बिना किसी विशिष्ट उद्देश्य के व्यक्तिगत जरूरतों (शादी, यात्रा, मेडिकल इमरजेंसी) के लिए लिया जाने वाला लोन।

Credit Card Loans / Credit Card Spending:

 क्रेडिट कार्ड के माध्यम से लिया गया क्रेडिट या अप्रूव्ड पर्सनल लोन।

Education Loans (बिना Collateral के):

कुछ सीमाओं तक बिना जमानत के दिए जाने वाले छात्र ऋण।

Business Loans (लघु व्यवसाय ऋण): 

एमएसएमई या नए उद्यमियों को बिना गारंटी दिए जाने वाले अनसिक्योर्ड बिजनेस लोन।

फायदे (Benefits):

इस तरह के लोन के निम्नलिखित फायदे हैं:

कोई जमानत नहीं:

लोन लेने के लिए अपनी किसी भी संपत्ति को गिरवी रखने की जरूरत नहीं होती।

त्वरित प्रोसेसिंग (Instant Disbursal):

डिजिटल वेरिफिकेशन और न्यूनतम दस्तावेजों के साथ लोन बहुत जल्दी खाते में आ जाता है।

उपयोग की स्वतंत्रता:

लोन राशि का उपयोग किसी भी वैध व्यक्तिगत या व्यावसायिक कार्य के लिए किया जा सकता है।

सीमाएं और Lender Risk:

सीमाएं और ऋण प्रदाता का रिस्क निम्नलिखित दिया गया है:

उच्च ब्याज दर:

बिना जमानत के लोन देने पर लेंडर का क्रेडिट जोखिम (Credit Risk) अधिक होता है, इसलिए ब्याज दरें अपेक्षाकृत काफी ऊंची होती हैं।

कम लोन राशि व छोटी अवधि:

लोन राशि आमतौर पर आवेदक की मासिक आय पर निर्भर करती है और पुनर्भुगतान अवधि सामान्यतः 1 से 5-7 वर्ष तक ही सीमित होती है।

सख्त क्रेडिट स्कोर मानदंड:

कम सिबिल स्कोर वाले आवेदकों का पर्सनल लोन आवेदन तुरंत खारिज हो सकता है।


Secured vs Unsecured Loan Comparison Table:

नीचे दी गई तालिका में दोनों प्रकार के लोन के प्रमुख मापदंडों की तुलना की गई है:

पैरामीटर
Parameter
🔐 Secured Loan
सुरक्षित ऋण
⚡ Unsecured Loan
असुरक्षित ऋण
जमानत (Collateral) आवश्यक
घर, सोना, वाहन, एफडी आदि
आवश्यक नहीं
किसी प्रकार की जमानत नहीं
ब्याज दर
Interest Rate
अपेक्षाकृत कम
बैंक/लेंडर की वर्तमान शर्तों के अनुसार
अपेक्षाकृत अधिक
जोखिम प्रीमियम के कारण
ऋण राशि
Loan Amount
अधिक हो सकती है
संपत्ति/Collateral के मूल्य और पात्रता पर निर्भर
आमतौर पर सीमित
आय, क्रेडिट प्रोफाइल और लेंडर की नीति पर निर्भर
पुनर्भुगतान अवधि
Tenure
लंबी अवधि
लोन के प्रकार के अनुसार 5 से 30 वर्ष तक हो सकती है
छोटी से मध्यम अवधि
लोन के प्रकार के अनुसार अवधि अलग हो सकती है
प्रोसेसिंग समय
Processing Time
कानूनी जांच और संपत्ति वैल्युएशन के कारण अधिक समय लग सकता है दस्तावेज और पात्रता पूरी होने पर प्रोसेसिंग अपेक्षाकृत तेज हो सकती है
सिबिल स्कोर का प्रभाव महत्वपूर्ण है, लेकिन Collateral भी जोखिम को प्रभावित करता है बहुत महत्वपूर्ण
आय और क्रेडिट प्रोफाइल के साथ लेंडर के निर्णय में अहम भूमिका
लेंडर का जोखिम
Lender's Risk
आमतौर पर कम
क्योंकि Collateral उपलब्ध होता है
आमतौर पर अधिक
क्योंकि कोई Collateral उपलब्ध नहीं होता
डिफॉल्ट का प्रभाव
Default Impact
शर्तों के अनुसार Collateral पर कार्रवाई हो सकती है और क्रेडिट स्कोर प्रभावित हो सकता है रिकवरी प्रक्रिया/कानूनी कार्रवाई हो सकती है और क्रेडिट स्कोर प्रभावित हो सकता है
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Secured Loan vs Unsecured Loan: सुरक्षित और असुरक्षित ऋण में अंतर

सुरक्षित और असुरक्षित ऋण में अंतर – Collateral, ब्याज दर, ऋण राशि और अवधि की तुलना
सुरक्षित और असुरक्षित ऋण की जमानत, ब्याज दर, ऋण राशि, अवधि और जोखिम के आधार पर तुलना।


Statistics / Data Snippet (आधिकारिक आंकड़े):

भारत में बैंकिंग और सूक्ष्म वित्त क्षेत्र में बिना गारंटी/जमानत के वित्तीय समावेश को बढ़ावा देने के लिए सरकारी योजनाओं का बड़ा योगदान रहा है।

🏦 प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY)

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) को 8 अप्रैल 2015 को शुरू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य सूक्ष्म उद्यमों को बिना किसी जमानत (Collateral-free) के संस्थागत क्रेडिट उपलब्ध कराना है।

📊 PMMY प्रगति आंकड़े — 28 फरवरी 2025 तक
कुल स्वीकृत खाते
52.07 करोड़
Approved Accounts
कुल स्वीकृत राशि
₹33.19 लाख करोड़
Sanctioned Amount
कुल वितरित राशि
₹32.40 लाख करोड़
Disbursed Amount
📈 पारदर्शिता और External Benchmark

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देशों के अनुसार, 1 अक्टूबर 2019 से नए फ्लोटिंग-रेट पर्सनल और रिटेल लोन के लिए पात्र बैंकों द्वारा External Benchmark आधारित ब्याज दर व्यवस्था लागू की गई। इसमें RBI Repo Rate जैसे बाहरी बेंचमार्क का उपयोग किया जा सकता है, जिससे ब्याज दर निर्धारण में अधिक पारदर्शिता आती है।

💡 महत्वपूर्ण: PMMY के तहत वास्तविक ऋण राशि, पात्रता, ब्याज दर और अन्य शर्तें संबंधित लेंडर तथा लागू नियमों पर निर्भर करती हैं। External Benchmark संबंधी नियम भी लोन के प्रकार और लागू RBI निर्देशों के अनुसार देखें।
📌 स्रोत: वित्तीय सेवाएं विभाग, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार एवं भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के संबंधित दिशानिर्देश/रिपोर्ट।


Visual Graph Snippet (Illustrative Comparison):

नीचे दिया गया विजुअल ग्राफ सामान्य वित्तीय रुझानों के आधार पर Secured और Unsecured लोन के मुख्य घटकों की सांकेतिक तुलना (Illustrative Comparison) प्रस्तुत करता है:

Secured vs Unsecured Loan

कंपैरेटिव रिस्क व कॉस्ट इंडेक्स (Illustrative)
औसत ब्याज दर (Interest Rate Level)
Secured कम
Unsecured अधिक
अधिकतम लोन अवधि (Maximum Tenure)
Secured 30 वर्ष तक
Unsecured 5–7 वर्ष
स्वीकृति समय व सुगमता (Approval Speed)
Secured धीमी
Unsecured त्वरित
*यह ग्राफ केवल विभिन्न घटकों के सापेक्षिक व्यवहार को दर्शाने वाली सांकेतिक (Illustrative) तुलना है। वास्तविक ब्याज दर, अवधि और स्वीकृति समय lender, borrower profile और loan type पर निर्भर करते हैं।


कौन सा Loan कब चुनें? (परिस्थितियों के अनुसार):

किसी एक विकल्प को सार्वभौमिक रूप से "सबसे अच्छा" नहीं कहा जा सकता; सही चुनाव आपकी जरूरत, समय और संपत्ति की उपलब्धता पर निर्भर करता है:

1. मकान या जमीन खरीदते समय (Home Loan / LAP):

जब आपको बहुत बड़ी राशि और लंबी पुनर्भुगतान अवधि की आवश्यकता हो, तो **Secured Loan** ही सबसे व्यावहारिक विकल्प है क्योंकि इसकी EMI कम और ब्याज दरें किफायती होती हैं।

2. अचानक आए आकस्मिक खर्च (Emergency / Medical Expenses):

यदि समय बहुत कम है और तुरंत फंड की जरूरत है, तो Unsecured Personal Loan बेहतर रहता है क्योंकि इसमें संपत्ति सत्यापन का समय नहीं लगता।

3.व्यापार विस्तार या कार्यशील पूंजी (Business Expansion):

यदि आपके पास बंधक रखने के लिए कमर्शियल प्रॉपर्टी है, तो सिक्योर लोन से कम ब्याज पर फंड मिल सकता है। अन्यथा, बिनाCollateral वाली सरकारी योजनाओं (जैसे मुद्रा योजना या एमएसएमई क्रेडिट गारंटी) का लाभ उठाया जा सकता है।

4.सोना उपलब्ध होने पर त्वरित जरूरत (Gold Loan):

यदि आपके पास घरेलू सोना उपलब्ध है, तो पर्सनल लोन लेने के बजाय गोल्ड लोन लेना अधिक किफायती साबित हो सकता है क्योंकि यह सिक्योर लोन होने के कारण कम ब्याज दर पर मिल जाता है।


Default होने पर क्या होता है?

लोन डिफॉल्ट होने पर निम्नलिखित अवस्था का सामना करना पड़ सकता है:

ऋण का समय पर भुगतान न करना (Default) उधारकर्ता के लिए गंभीर कानूनी और वित्तीय परिणाम ला सकता है:

Secured Loan में डिफॉल्ट:

सिक्योर्ड लोन में डिफॉल्ट होने पर निम्नलिखित परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है:

संपत्ति की जब्ती व नीलामी:

यदि उधारकर्ता बार-बार नोटिस मिलने के बाद भी भुगतान नहीं करता, तो लेंडर कानूनी प्रक्रियाओं (जैसे SARFAESI Act, 2002) के तहत बंधक संपत्ति को जब्त करके और नीलाम करके अपनी बकाया राशि वसूल कर सकता है।

CERSAI रजिस्ट्रेशन:

बैंकों द्वारा बंधक संपत्तियों का ब्योरा CERSAI (Central Registry) पर दर्ज किया जाता है ताकि धोखाधड़ी रोकी जा  सके।


Loan Default होने पर क्या होता है? Secured Loan में SARFAESI और CERSAI

लोन डिफॉल्ट होने पर क्या होता है? Secured Loan में संपत्ति जब्ती, नीलामी और CERSAI की जानकारी
लोन डिफॉल्ट की स्थिति में संभावित वित्तीय और कानूनी प्रभाव तथा Secured Loan में संपत्ति जब्ती, नीलामी और CERSAI से जुड़ी जानकारी।


Unsecured Loan में डिफॉल्ट:

Unsecured Loan में डिफॉल्ट होने पर निम्नलिखित नुकसान का सामना हो सकता है:

क्रेडिट स्कोर में भारी गिरावट:

अनसिक्योर्ड लोन डिफॉल्ट होने पर आपका सिबिल स्कोर तेजी से गिरता है, जिससे भविष्य में किसी भी बैंक से लोन या क्रेडिट कार्ड मिलना लगभग असंभव हो जाता है।

रिकवरी प्रक्रिया व कानूनी नोटिस:

लेंडर सिविल रिकवरी सूट दायर कर सकता है या कानूनी चैनलों के माध्यम से वसूली की कार्रवाई शुरू कर सकता है। हालांकि, भारतीय कानून के तहत उधारकर्ता के साथ निष्पक्ष व्यवहार अनिवार्य है।


10. Financial Tools (Interactive Calculators)

निम्नलिखित tools के मदद से EMI और व्याज की गणना कर सकते हैं:

Tool 1: Working EMI Calculator:

नीचे दिए गए कैलकुलेटर में अपनी लोन राशि, वार्षिक ब्याज दर और अवधि दर्ज करके अपनी मासिक किस्त (EMI) की गणना करें:

EMI Calculator

*यह कैलकुलेटर अनुमानित EMI दिखाता है। वास्तविक EMI lender की दर, शुल्क और शर्तों के अनुसार अलग हो सकती है।


Tool 2: Loan Interest & Total Repayment Calculator:

यह टूल आपको लोन की कुल लागत और मूल राशि बनाम ब्याज का अनुपात समझने में मदद करता है:

Loan Interest & Total Repayment Calculator

*यह कैलकुलेटर अनुमानित लागत दिखाता है। वास्तविक EMI और ब्याज lender की दर, शुल्क तथा repayment schedule के अनुसार अलग हो सकते हैं।


Practical Checklist (ऋण लेने से पहले जांचने योग्य चीजें):

Loan Agreement Sign करने से पहले क्या जांचें?

बैंक या लेंडर से लोन अनुबंध साइन करने से पहले इन महत्वपूर्ण बिंदुओं को जरूर जांचें।

1. वार्षिक प्रतिशत दर (APR / Total Cost of Credit)
केवल नाममात्र ब्याज दर न देखें। सभी लागू शुल्कों को मिलाकर लोन की कुल वार्षिक लागत (APR) को समझें।
2. Key Fact Statement (KFS)
लोन की प्रमुख लागत, ब्याज, फीस और अन्य महत्वपूर्ण शर्तों का विवरण देने वाला KFS जरूर पढ़ें और समझें।
3. प्रोसेसिंग फीस (Processing Fee)
आवेदन या लोन स्वीकृति के समय लगने वाली प्रोसेसिंग फीस की राशि, GST तथा यह शुल्क refundable है या non-refundable, इसकी जांच करें।
4. Foreclosure / Prepayment Charges
लोन को समय से पहले बंद करने या आंशिक भुगतान करने पर लागू शुल्क और RBI के संबंधित नियमों को जरूर जांचें।
5. Fixed vs Floating Interest Rate
पता करें कि आपकी ब्याज दर Fixed है या Floating। Floating Rate में भविष्य में ब्याज दर और EMI बदल सकती है।
6. CIBIL Score & Credit Report
लोन के लिए आवेदन करने से पहले अपनी क्रेडिट रिपोर्ट जांचें और उसमें किसी गलती या अनजान खाते की जानकारी होने पर उसे verify करें।
7. पुनर्भुगतान क्षमता (Repayment Capacity)
EMI तय करते समय अपनी आय, मौजूदा कर्ज और नियमित खर्चों को ध्यान में रखें। केवल किसी एक सामान्य प्रतिशत सीमा पर निर्भर रहने के बजाय अपनी वास्तविक repayment capacity का आकलन करें।
ध्यान दें: लोन की वास्तविक लागत, ब्याज दर, शुल्क, prepayment नियम और eligibility lender तथा loan type के अनुसार अलग हो सकते हैं। अनुबंध साइन करने से पहले KFS और loan agreement की सभी शर्तें पढ़ें।


निष्कर्ष:

Secured और Unsecured Loan दोनों ही वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के प्रभावी साधन हैं, बशर्ते उनका चयन सोच-समझकर किया जाए। 

यदि आपके पास बंधक रखने के लिए संपत्ति उपलब्ध है और आपको कम ब्याज पर बड़ी राशि चाहिए, तो Secured Loan उपयुक्त विकल्प है। 

वहीं, त्वरित व बिना किसी संपत्ति जोखिम के छोटे फंड की आवश्यकता के लिए Unsecured Loan सुविधाजनक रहता है।

लोन चुनते समय केवल स्वीकृत राशि न देखें, बल्कि अपनी पुनर्भुगतान क्षमता, कुल लोन लागत (APR), कोलेटरल रिस्क और विभिन्न बैंकों की शर्तों की तुलना जरूर करें।


📚 स्रोत (Sources)



FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न):

Q1. Secured Loan क्या होता है?

उत्तर: Secured Loan वह ऋण है जिसमें लेंडर के पास सुरक्षा के रूप में कोई संपत्ति (जैसे घर, सोना या एफडी) गिरवी रखनी पड़ती है।

Q2. Unsecured Loan क्या होता है?

उत्तर: Unsecured Loan बिना किसी जमानत के केवल आवेदक की आय, क्रेडिट इतिहास और सिबिल स्कोर के आधार पर दिया जाने वाला लोन है।

Q3. Secured Loan में Collateral क्यों चाहिए?

उत्तर: Collateral लेंडर के क्रेडिट जोखिम को कम करता है। यदि उधारकर्ता लोन नहीं चुका पाता, तो लेंडर उस संपत्ति को बेचकर अपना नुकसान पूरा कर सकता है।

Q4. क्या Unsecured Loan की ब्याज दर हमेशा अधिक होती है?

उत्तर: हां, क्योंकि इसमें लेंडर के पास कोई भौतिक सुरक्षा (Collateral) नहीं होती, इसलिए उच्च जोखिम को कवर करने के लिए ब्याज दरें अपेक्षाकृत अधिक रखी जाती हैं।

Q5. Personal Loan Secured है या Unsecured?

उत्तर: सामान्य पर्सनल लोन पूरी तरह से Unsecured Loan की श्रेणी में आता है, क्योंकि इसके लिए कोई संपत्ति गिरवी नहीं रखनी पड़ती।

Q6. Loan लेने से पहले किन प्रमुख शुल्कों की जांच करनी चाहिए?

उत्तर: लोन लेने से पहले प्रोसेसिंग फीस, प्रीपेमेंट/फोरक्लोजर चार्ज, लेट पेमेंट पेनाल्टी और Key Fact Statement (KFS) में दर्ज कुल APR की जांच करनी चाहिए।

आपसे सवाल:

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